वर्तमान परिदृश्य में जो मैंने देखा, जो मैंने समझा,और जो मैंने जाना,वही अपने शब्दों के माध्यम से बता रहा हु,यदि मेरे शब्द आपको आहात करते है,तो इसके लिए मैं माफी चाहुंगा…लेकीन वर्तमान परिदृश्य में वास्तविकता यही है !पत्रकारिता करीयर के दौरान हर एक पत्रकार का कभी न कभी गाँव, कस्बो और छोटे शहरों में जाना होता है।आज से कुछ सालों पहले ऐसी जगहों पर पत्रकारों को किसी बड़े अधिकारी से ज्यादा ही सम्मान मिलता था।उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाता था और खूब खातिरदारी भी होती थी।लेकिन बीते पाँच से सात सालों में लोगों का पत्रकारों के प्रति व्यवहार अब बिल्कुल बदलने लगा है।अब तो हालात यह हो चुके हैं कि कई जगह पत्रकार खुद पत्रकार बताने में भी शर्म महसूस करते हैं।बहुत साल पहले मैं जब किसी से मिलता था तो शान से कहता था कि मैं पत्रकार हूं।लेकिन अब छुपाता हूं। मुझे मालूम है कि पत्रकार कहते ही लोगों के दिमाग में दो ही बातें आती हैं।दलाल होगा।जुगाड़ू होगा।पत्रकार सुन कर कई लोग भाव भी देते रहे हैं, इसी उम्मीद में किसी दिन कहीं कोई काम पड़ा तो इनके ज़रिए किसी नेता-वेता को कह कर करा लेंगे।आज पत्रकारिता बुरे दौर से गुजरने पर मजबूर है अब तो वह दौर आ चुका है कि पैसे के लिए यह अपने ही किसी साथी की बलि बहुत ही संयत भाव से चढ़ा सकते हैं।आज के युग में मीडिया तीन भागों में बांट दिया गया है प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल मीडिया।इन तीनों मीडिया के बीच एक और मीडिया है जो इन तीनों मीडिया को बदनाम करने के लिए अकेले सब पर भारी है जिसको आप कह सकतें हैं दलाल मीडिया।जिनको खबरों से कुछ लेना-देना नहीं होता है देश के प्रति समाज के प्रति इनका कोई रुझान नहीं होता।लेकिन इनका भौकाल देख कर शासन प्रशासन भी गुमराह हो जायेगा।बड़ी बड़ी बातें नेता विधायक,सांसद,मंत्री व अधिकारियों के साथ सेल्फ़ी महंगे सूट-बूट पहने अक्सर ये किसी न किसी कार्यालय में मिल जायेंगे।
और एक ख़बर लिखने वाले पत्रकार पर अपना प्रभाव दिखा कर रौब झाड़ेंगे ख़ास कर उस पत्रकार से जो निष्पक्ष पत्रकारिता करके इमानदारी से देश और समाज की सेवा करता है।कहीं वो डिजिटल मीडिया का स्वतंत्र पत्रकार हो तो उसे और दबाने की कोशिश करेंगे और अपने आकाओं को बतायेंगे की ये यूट्यूबर है।ऐसे दलाल तथाकथित पत्रकारों की पकड़ थाने चौकी पर बहुत बढ़िया से होती है जिससे चौकी प्रभारी थाना प्रभारी ऐसे तथाकथित पत्रकारों के कहने से बड़ी आसानी से उस पत्रकार पर फर्जी मुकदमा दर्ज करके न्यायालय का रास्ता दिखा देते हैं।पत्रकार वो नहीं होता जो बाइक में,कार में, प्रेस लिखवा ले गले में आई कार्ड डाल ले और पुलिस चौकी, थानों पर, नगरनिगम, नगर परिषद, नगर पंचायत,एलडीए में रेलवे ट्राफिक आर टी ओ जैसे विभागों में दिखे और दलाली करे और उसका ख़बर कभी पढ़ने को देखने को न मिले।ऐसे लोग सही पत्रकार को नीचा दिखाने के लिए डिग्री की बात करेंगे पहनावा कठ काठी की बात करेंगे और अपने आपको सबसे बड़े बैनर का पत्रकार बता कर शासन प्रशासन को गुमराह करके एक अच्छे पत्रकार को बदनाम करेंगे।ऐसे लोगों से सावधान रहें सुरक्षित रहें।दरअसल इस तरह के पत्रकार खबरों की जगह ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली के जुगाड़ में घूमते रहते हैं। रोसड़ा समस्तीपुर समेत प्रदेश के पुलिस थाने,ब्लॉक ऑफिस,आरटीओ ऑफिस,नगर निगम, नगर पंचायत कार्यालयों में दलाल बनें ये फर्जी पत्रकार घूमते रहते हैं और खबरें प्रसारित करने की धमकी देकर वसूली करते हैं।शासन प्रशासन ऐसे फर्जी पत्रकारों से परेशान है।ये सरकार की छवि धूमिल कर रहे हैं। इन लोगों की वजह से सही और शरीफ लोगों का जीना मुहाल हो रहा है।पत्रकारिता की आड़ में लोगों को डराना,धमकाना, वसूली करना,मानसिक शोषण करना इनका धंधा बन चुका है।अच्छा पत्रकार वही होता है जो निष्पक्ष,राग-द्वेष से रहित हो कर और निर्भीक हो कर सत्य जनता के समक्ष रखे,जो दिन को दिन और रात को रात कहे। वैसे आज देश का चौथा स्तंभ कहे जाने वाला पत्रकार के लिए आज के समय में पत्रकारिता करना एक जोखिम भरा सफर बन गया है। सच्चाई के रास्ते पर निष्पक्ष पत्रकारिता करना इतना कड़वा सच हो गया है,जैसे किसी के साथ कोई अप्रिय घटना कर दी हो। खनन माफिया,भूमाफिया, स्मैक तस्करों, सट्टा किंग, दलालों, हथियार तस्कर और भ्रष्ट अधिकारियों के काले कारनामों का पर्दाफाश करना, आज के समय में सच की राह पर चलने वाले पत्रकार को महंगा पड़ रहा है। जो पत्रकार गरीबों, शोषितों, बेसहारों की आवाज उठाता था, वह आज अपनी आवाज भी नहीं उठा सकता। गौरतलब है कि, पत्रकारिता अब जुनून नहीं, बना जेब का माध्यम